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पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते गांव ने खो दी तीन मासूम जिंदगियां…

पानी नहीं दे पाया सिस्टम… और तीन मासूम बेटियां मौत के कुएं में समा गईं

तारिक खान-रायसेन की आवाज़ & प्रदेश की स्याही

रायसेन जिले के गैरतगंज तहसील के ग्राम सागौर में जो हुआ, वह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि सरकारी लापरवाही से हुई तीन मासूम जिंदगियों की मौत है। गांव की तीन बच्चियां पानी भरने और नहाने के लिए निजी कुएं पर गई थीं, जहां डूबने से तीनों की दर्दनाक मौत हो गई।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन मासूमों को कुएं तक जाना ही क्यों पड़ा?

ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि गांव में पानी का भारी संकट है। हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है, 15-15 दिन तक पानी की सप्लाई नहीं होती और लोग एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं खुली।

अगर पीएचई विभाग समय पर हैंडपंप सुधार देता…
अगर गांव में नियमित पानी पहुंचता…
अगर अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लिया होता…
तो शायद आज तीन बेटियां जिंदा होतीं

वही सवाल ये भी है आखिर पीएचई विभाग किस बात की तनख्वाह ले रहा है? जब गांव की महिलाएं और बच्चियां पानी के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हों, तब विभाग की “कागजी योजनाएं” किस काम की?

घटना की सूचना मिलते ही गैरतगंज एसडीएम और एसडीओपी मौके पर पहुंचे, लेकिन अब ग्रामीणों की मांग है कि सिर्फ जांच नहीं, बल्कि पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो।


क्योंकि यह सिर्फ डूबने से हुई मौत नहीं…यह सिस्टम की बेरुखी और पानी के लिए तरसते गांव की चीख है।

अब आगे देखना ये है ज़िम्मेदारो पर कार्यवाही होती है या फिर आगे किसी मासूमो की ज़िन्दगियों के साँथ खिलवाड़ होता है।

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