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मुंह में कैंसर, पेट में भूख… लेकिन सिस्टम को चाहिए सिर्फ आयुष्मान कार्ड

कैंसर से तड़प रहा है हैदर… लेकिन सिस्टम के पास उसके लिए सिर्फ तारीखें हैं”
तारिक खान - रायसेन की आवाज़ & प्रदेश की स्याही

रायसेन जिले का रहने वाला हैदर आज जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहा है। मुंह के कैंसर ने उसकी हालत ऐसी कर दी है कि अब वह ठीक से न खा पा रहा है और न ही पानी पी पा रहा है। चेहरे पर दर्द साफ दिखाई देता है, लेकिन उससे बड़ा दर्द उस सिस्टम का है जिसने इलाज से पहले कागज़ मांग लिए।

परिजनों का कहना है कि पिछले लगभग 3 महीने से वे आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए नगर पालिका से लेकर कलेक्ट्रेट ऑफिस तक चक्कर काट रहे हैं। हर जगह सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन कार्ड नहीं बना।

इधर हैदर कई बार भोपाल के हमीदिया अस्पताल और कैंसर अस्पताल पहुंचा, लेकिन आयुष्मान कार्ड न होने की वजह से इलाज आगे नहीं बढ़ पाया। गरीब परिवार के पास इतना पैसा नहीं कि महंगे इलाज का खर्च उठा सके।
एक तरफ सरकार करोड़ों की योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, दूसरी तरफ एक गरीब कैंसर मरीज सिर्फ इसलिए तड़प रहा है क्योंकि उसके पास एक कार्ड नहीं है। सवाल ये है कि आखिर जिंदगी ज्यादा जरूरी है या कागज़?

हैदर की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। परिवार की आंखों में डर साफ दिखाई देता है कि कहीं सिस्टम की लापरवाही उनके अपने को उनसे छीन न ले।

अब देखना होगा कि रायसेन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस खबर के बाद जागता है या फिर एक और गरीब इलाज के इंतजार में दम तोड़ देगा।

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